प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

प्रेगनेंसी


जब स्त्री गर्भ धारण करती है, तो ऐसी स्तिथि में उसके शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगते है। जब भी कोई नवविवाहिता स्त्री प्रथम बार गर्भवती होती है तब उसे गर्भवती होने का अहसास नहीं हो पाता है, इसलिए उसे समझ ही नहीं आता की वह गर्भवती हो चुकी है। आइये आज इस पोस्ट में हम ऐसे ही कुछ प्रेगनेंसी कारणों के बारे में जानते है, जो गर्भ ठहर जाने पर सामान्यतया सभी स्त्रियों में देखने को मिलते है।

 प्रेगनेंसी के लक्षण

आज हम बात करेंगे प्रेगनेंसी के 11 शुरुआती लक्षणों की । वैसे , प्रेगनेंसी  चेक करने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट किट का ही है इस्तेमाल किया जाना चाहिए  और यह सबसे ज्यादा आसान और सही तरीका भी होता है।

लेकिन अगर इसके अलावा अगर आप जानना चाहते हैं कि आप  प्रेग्नेंट है या नहीं तो  आप कुछ लक्षणों से भी अंदाजा लगा सकते हैं कि आप प्रेग्नेंट है या नहीं। इसमें हर महिला की प्रेगनेंसी के Symptoms अलग-अलग हो सकते हैं।

इसमें दो तरह के लक्षण हो सकते हैं ,एक तो वह लक्षण जो ज्यादातर महिलाओं में दिखाई देते हैं ,और कुछ ऐसे लक्षण जो कम ही महिलाओं में दिखाई देते हैं।

जिन लक्षणों को बताया जा रहा है ,उनसे यह अंदाजा लगाना कि आप 100% परसेंट प्रेग्नेंट है ,यह सही नहीं होगा। लेकिन 80% अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन इन लक्षणों के होने के बावजूद भी आप अपना प्रेगनेंसी टेस्ट जरूर करवाएं।

सबसे पहले हम उन लक्षणों की बात करेंगे जो हर महिला में दिखाई देते हैं। 

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1. जिसमें सबसे पहला है ब्लड स्पॉट


जब आपका अंडा फर्टाइल  होता है तो वह फैलोपियन ट्यूब से निकलकर यूट्रस में आता है और endometrium line को कुरेदता है।  ताकि वह अपने लिए जगह बना सके। ऐसे में आपको हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो सकती है। अगर आप का अंडा फर्टाइल हुआ है। तभी यह होगा इसलिए हर महिला को यह ध्यान देना चाहिए कि उनको स्पॉटिंग हुई है या नहीं ,क्योंकि यह इतनी हल्की होती है कि अगर आप ध्यान ना दें तो आपको पता भी नहीं चलेगा। 

2. मासिक धर्म का रुकना


स्त्री के नियमित रूप से होने वाला मासिक धर्म अगर समय ऊपर हो जाने पर भी नहीं होता है तो गर्भ की प्रबल संभावनाएं की जा सकती है।
जब एक बार गर्भ धारण पर मासिक रुक जाता है तो फिर यह सामान्य तौर पर प्रसव के लगभग 6 सप्ताह के बाद ही शुरू होता है।

कभी कभी ऐसा होता है की गर्भ ठहर जाने के बाद हार्मोनल कारणों से थोड़ा रक्तस्राव होने लगता है, जिन्हें स्त्रियां समझ नहीं पाती और उसे मासिक धर्म ही समझ बैठती है, किन्तु यह स्राव थोड़ी मात्रा में और अल्प दिनों के लिए ही होता है।
इसलिए लगभग सभी स्त्रियां मासिक के भ्रम में ही रहती है।

ऐसा अनुभव होना सामान्य है, इसलिए ऐसी परिस्थिति में या पीरियड मिस होने के 10 दिन बाद आप अपना प्रेगनेंसी टेस्ट कीजिए , आपका गर्भधारण हुआ है या नहीं आपको सही-सही पता लग जायेगा।

3. मतली, मिचली या उल्टी


प्रेगनेंसी के 9 महीनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है। शुरुआती 3 महीनों को मॉर्निंग सिकनेस यानि (प्रातः कालीन अस्वस्थता) कहते हैं।
इसमें जब आप सुबह सोकर उठते है तो आपको ऐसा लगेगा जैसे आपको उल्टी आ रही है। आपको उल्टी आने जैसी फीलिंग होगी और आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा, इसलिए इसे “प्रातः कालीन अस्वस्थता” बोला गया है।

ऐसे लक्षण गर्भ धारण के 3 माह में अधिक देखे जाते है, इसलिए यह गर्भ धारण का दूसरा प्रमुख लक्षणों में से एक माना जाता है।

ऐसी स्थिति में उबकाई और उलटी का एहसास दिनभर में कभी भी होते रह सकता है, किन्हीं स्त्रियों को तो उल्टियां होने भी लगती है।
ऐसा जायदातर खाने के समय या खाने की गंध आने पर होने लगता है। ऐसी स्थिति में की उलटी न हो, गर्भवती स्त्रियों को थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन लेना चाहिए ताकि उनका पेट भी खाली न रहे।
अगर उल्टियों की बहुत अधिक परेशानी हो रही हो तो डॉक्टर से सलाह आवश्य ले लेनी चाहिए।

एक शोध के अनुसार डॉक्टरों का ऐसा मानना है की जिन स्त्रियों को अधिक उबकाई आती है वे स्त्रियां अधिक स्वस्थ बच्चों को जन्म देती है। 

प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
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 4. गंध से जी मिचलाना


गर्भावस्था में किसी भी प्रकार की गंध से जी का मिचलाना स्वाभाविक होता है, यह गंध ज्यादातर स्त्रियों को खाने पीने की वस्तुओं से ही आती है और उनका जी मिचलाने लगता है।
यह गंध घर में खाने की चीजों से लग सकती है, मांस, मछली से हो सकती है, सेंट, परफ्यूम, सिगरेट, पेट्रोल, या अन्य बहुत सी वस्तुओं से हो सकती है।
ऐसा भी होता है की जो खाने पीने की चीजें स्त्रियों को गर्भधारण से पहले बहुत अच्छी लगती हो, लेकिन गर्भधारण के बाद उन्हें देखते ही या उनकी गंध से ही जी मिचलाने लगता है या उल्टी हो जाती है।

सर्वो से पता लगा है की जिन गर्भवती महिलाओं को कम गंध का अहसास होता है उन्हें जी मिचलाने या उल्टी की शिकायत भी कम होती है।
98 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उल्टी की शिकायत देखने को मिली है, लगभग 48 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को जी मिचलाने की शिकायत रहती है और लगभग 25 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को दोनों तरह की समस्या रहती है।

इसलिए जिन गर्भवती महिलाओं को जिस किसी चीज या खाने पीने की वस्तु को देखकर जी मिचलाता हो, उन्हें उन चीजों से दूर रहना चाहिए और कम खाना चाहिए।

 5. मूत्राधिक्य लक्षण


गर्भधारण के लक्षणों में एक लक्षण है मूत्राधिक्य, गर्भवती महिलाओं को बार बार यानि की लगभग हर 2 घंटे में पेशाब लगता है, और रात को सोने के समय में भी उन्हें 2 से 3 बार पेशाब के लिए उठना ही पड़ता है,

गर्भवती महिलाओं में यह मूत्राधिक्य लक्षण सामान्य ही माना जाता है, जब तक पेशाब में किसी तरह की कोई जलन नहीं है तब तक किसी भी तरह से घबराने की जरुरत नहीं है।
यह मूत्राधिक्य लक्षण लगभग चौथे माह तक रहती है उसके बाद यह अपनेआप ही खत्म हो जाती है, उसके बाद 8वें और 9वें माह में पुःन देखने को मिलती है। 

6. आलस्य के लक्षण


गर्भ धारण करने के शुरुआती कुछ हफ्तों तक शरीर में काफी आलस्य  देखने को मिलता है, शारीरिक थकावट, पुरे बदन में दर्द होना, जैसे लक्षण देखने को मिलते ही है,
ऐसे समय में गर्भवती स्त्रियों को आराम की अति आवश्यकता होती है और ऐसी अवस्था में वे जितना अधिक आराम करेंगी उनके लिए उतना ही अच्छा रहेगा।

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7. खाने के स्वाद में बदलाव


जब आप प्रेगनेंसी कंसीव करती हैं या तो आपको भूख बिल्कुल नहीं लगती है या फिर आपको भूख बहुत ज्यादा लगने लग जाती है। इसका कारण है शरीर में होने वाले हार्मोननल चेंजेज। ऐसे में क्या होता है कि ,जो चीजें आपको पहले बिल्कुल नहीं पसंद थी ,वह भी पसंद आने लग सकती हैं। और इसके विपरीत जो चीजें आपको पसंद थी, हो सकता है वह आपको पसंद ना आने लगे। इसके अलावा आपको खाने से गंध आने की समस्या भी हो सकती है।

8. स्तनों का फूलना जैसे लक्षण


जब भी कोई महिला गर्भधारण करती है तब उसके स्तनों के आकार में बदलाव शुरू हो जाता है, उसके स्तनों में वृद्धि होने लगती है, स्तनों में उभार बढ़ने लग जाता है, ऐसा परिवर्तन इसलिए होने लगता है क्योंकि दुग्ध ग्रंथिया सक्रिय हो जाती है।

स्तनाग्र में उभर आ जाता है, 7वें महीने के बाद तो स्तनाग्र काफी उभर जाते है और स्तनों पर छोटी छोटी फुंसिया भी उभर आती है। स्तनों पर नीली रंग की नसें दिखनी शुरू हो जाती है और स्तनों में दर्द भी हो सकता है। 

9. अपच और अफारा


बहुत सी गर्भवती महिलाओं को इन दिनों में अपच की समस्या देखने को मिलती है, जिसके कारण उनके पेट में जलन हो सकती है, हृदय में जलन हो सकती है, खट्टी डकारे आ सकती है, एसिडिटी रह सकती है,
ऐसी अवस्था में ऐसा देखने को मिला है की इस समय गर्भवती महिलाओं में चॉक पत्थर, सोंधी मिट्टी, मिटटी की बनी चीजें खाने का मन करने लगता है।

ऐसे समय में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए, और फलों और सब्जियों का उपयोग करना चाहिए, ऐसी खाने की चीजों से बचना चाहिए जो वायु उत्पन्न करती हो।

बहुत सी महिलाओं को गर्भकाल के प्रारंभिक दिनों में बहुत से खाद्य और पेय पदार्थो में अरुचि हो जाती है, जैसे की मांस मछली, दाल, चावल, भोजन, आदि और गर्भधारण के दूसरे महीने में तो इन सब को देखने से भी उनका जी मिचलाने लगता है। 

10. शारीरिक दर्द और ऐंठन


गर्भधारण करने के बाद महिलाओं में कई तरह के शारीरिक बदलाव आते है, इनमें से एक शारीरिक दर्द और ऐंठन भी होता है,
गर्भावस्था में महिलाओं को शारीरिक दर्द, पीठ में दर्द होना, तलवों, पावों में दर्द और ऐंठन होना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार टांगो पर नीली रंग की नसों का उभारना भी देखा जा सकता है,
यह दर्द और ऐंठन होते है और अपने से ही ठीक भी हो जाते है।

इन्हीं शारीरिक दर्द और ऐंठन से लो ब्लड प्रेशर की शिकायत भी हो जाती है, और शरीर में कैल्शियम की कमी भी हो जाती है,
गर्भ में शिशु का विकास होना शुरू हो जाता है, यही कारण है की शरीर में यह सब परिवर्तन देखने को मिलने लगते है। 

11. नींद ना आना और चक्कर आना


गर्भधारण करने के बाद महिलाओं को ठीक से नींद नहीं आने के लक्षण भी देखने को मिलते है,
इसका मुख्य रूप से कारण होता है ,गर्भवती होने पर महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते है, जिसकी चिंता में उसे ठीक से नींद नहीं आतीऔर दूसरा ऐसे समय पर पूरा आराम ना मिलने के कारण भी अनिंद्रा की शिकायत हो जाती है।

गर्भ में पल रहे शिशु का निरंतर विकास होने की वजय से लेटने में असुविधा होती है, गर्भ में पल रहा शिशु हलचल करता है, इन कारणों से भी ठीक से नींद नहीं आ पाती है।

गर्भधारण करने के बाद किसी भी स्त्री का अधकांश खून गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में लगना शुरू हो जाता है, ऐसे में शरीर में खून की कमी से ब्लड प्रेशर में असंतुलन होने लगता है, खून की कमी होने लगती है,
इस वजय से गर्भवती महिलाओं को घबराहट, बेचैनी, चक्कर आना जैसी परेशनियां होने लगती है।

ऐसे समय में अगर आप बैठी है या लेटी हुई है, तो अचानक से खड़े नहीं होना चाहिए, अगर आप अचानक से उठ खड़ी होती है तो आँखों के सामने अँधेरा आ सकता है, सर घूमने लग सकता है, और आप लड़खड़ा का गिर सकती है।
कई बार खून की अधिक कमी होने की वजय से बेहोशी भी आ सकती है, यह बेहोशी 1या 2 मिनट में अपने आप ठीक हो जाती है। अगर ऐसा हो तो मुँह पर पानी के कुछ छींटे मार देने चाहिए।

इस तरह के लक्षण लगभग 4 महीनें तक अधिक देखने को मिलते है।

चलिए अब बात करते हैं कुछ ऐसे सिम्टम्स कि जो सिर्फ कुछ महिलाओं में ही दिखाई देते हैं।  

सबसे पहला है स्किन डार्कनेस:


प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में आप में हार्मोनल चेंजेज होते हैं। जिससे आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है और आपके चेहरे पर काले काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। आपकी आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स भी आ सकते हैं। आपको सूरज की रोशनी से परेशानी हो सकती है, और सूरज की रोशनी में आपको अपनी स्क्रीन जलने जैसी फीलिंग आएगी।

दूसरा है मूड स्विंग्स:


गर्भधारण होते ही आपके व्यवहार में कई सारे बदलाव आ जाते हैं, क्योंकि शरीर में progesterone hormone का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में मूड स्विंग्स ( व्यवहार में बदलाव) होने की संभावना रहती है। ऐसे मैं आपको अपने फैमिली मेंबर्स के साथ रहना चाहिए,  ताकि आपको इन मूड स्विंग से कुछ आराम मिले।

तीसरा है सर दर्द:


गर्भधारण के शुरुआती दिनों में सरदर्द होना बहुत ही आम समस्या है, क्योंकि इस समय आपके शरीर में खून का प्रवाह तेज हो जाता है। वह इसलिए ताकि आपके गर्भ तक ऑक्सीजन ज्यादा पहुंच सके ,जिसकी आपके दिमाग को आदत नहीं होती है। इसलिए शुरुआती दिनों में सर दर्द हो सकता है और समय के साथ यह अपने आप ठीक होता चला जाता है।

चौथा लक्षण है वाइट डिस्चार्ज:


गर्भधारण के शुरुआती दिनों में कई महिलाओं को वाइट डिस्चार्ज होता है, जो कि एक बहुत ही सामान्य सी प्रक्रिया है।

तो ये है कुछ ऐसे शुरुआती लक्षण जिनसे हम एक अंदाज़ा लगा सकते है की क्या मै प्रेग्नेंट हो गई हूँ। ….

इन सब लक्षणों के बाद भी  प्रेगनेंसी (गर्भधारण) तब तक कंफर्म नहीं होती ,जब तक की आप अपना टेस्ट प्रेगनेंसी किट से ना कर लें। इसलिए प्रेगनेंसी टेस्ट जरूर करना चाहिए।

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