भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला

भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला

भरणी नक्षत्र

नक्षत्रों में भरणी नक्षत्र दूसरे नंबर का नक्षत्र है। मेष राशि इस नक्षत्र की राशि है और भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है, इसलिए इस नक्षत्र की महिलाओं में शुक्र और मंगल के प्रभाव देखने को मिलते है।

भरणी नक्षत्र के देवता, मृत्यु के देवता “यम” है। यम देवता व्यक्ति के अच्छे बुरे कर्मो के अनुसार सजा देते है, इसलिए भरणी नक्षत्र की महिलाओं में न्याय करने का स्वाभाव भी देखने को मिलता है। इस नक्षत्र के स्वामी शुक्र होने की वजय से इन महिलाओं में सौन्दर्य और प्रेम की तरफ आकर्षण, सांसारिक सुखों की प्राप्ति, कला-संगीत, रचनात्मक कार्यों के प्रति लगाव, सौंदर्य, वैभव, सुख-संपत्ति भोगने की प्रबल इच्छा देखी जा सकती है

भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला की शारीरिक रचना

भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला का खूबसूरत और आकर्षक डील डोल होता है। अव्यवस्तित दांत लेकिन सफ़ेद होते है, सर पर सुंदर बाल और चेहरा गोल आकृति का होता है। इनमें कुछ खास बातें देखने को मिलती है, एक तो इनक हमेशा कोई ना कोई गीत गुनगुनाने का शौक होता है, दूसरा ये हर खाने की वास्तु का स्वाद देखने की शौकीन होती है।

भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला का चरित्र और समान्य घटनाएं

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिलाएं दबंग, भावुक स्वाभाव और बहुत आशावादी होती है। इनका आचरण साफ सुथरा होता है, आदर्श चरित्र और जीवन में सोच विचारकर चलने वाली होती है। घर में बड़े बुजुर्गो और परिवार के सदस्यों का ख्याल रखने वाली होती है। अपने मन की करने वाली होती है, किसी दूसरे के सुझावो या बातों को कोई महत्त्व नहीं देती, उन्हें जो भी करना होता है उसे अपने मन के मुताबिक ही करती है।

शिक्षा, आर्थिक स्तिथि और कामकाज

ऐसे देखने को मिलेगा की भरणी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं कोई ना कोई काम करती हुई मिलेंगी, अपनी आजीविका स्वयं चलाती हुई मिलेंगी। इनकी शिक्षा मध्यम होती है, बहुत बड़ी बड़ी डिग्रियों वाली देखने को नहीं मिलती। व्यवसाय में भी इनका अच्छा हाथ रहता है। कोई भी कारोबार, दूर संचार, एंकरिंग, फैशन, मॉडलिंग, होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय, पर्यटन क्षेत्र, स्कूल, ऑफिस आदि क्षेत्रों से ये अपना जीवन यापन करती हुई देखि जा सकती है।

अगर ये कहीं मैनेजमेंट करने वाली, गाइड, किसी कंपनी की प्रमोटर, या सेल्स अधिकारी होंगी तो इन कार्यो में ये बहुत माहिर होंगी। ये अपने काम में खुश रहती है इन्हें अपने काम में बढ़ोतरी या परमोशन की कोई चिंता नहीं रहती।

अगर भरणी नक्षत्र की महिलाएं कला का कोई क्षेत्र, मनोरंजन क्षेत्र, खेल कूद, वस्त्र, आभूषणं, पूजन सामग्री जैसे कारोबार से जुड़ती है या इनका इम्पोर्ट एक्सपोर्ट करती है तो इनमें इन्हें काफी सफलता प्राप्त हो सकती है। तकनीकी और कलात्मक क्षेत्र इनके पसंदीदा क्षेत्र होते है।
अपने कमाए हुए धन को व्यर्थ में खर्च करना या उड़ाना इन्हें कतई पसंद नहीं होता है।

भरणी महिलाओं का गृहस्थ और वैवाहिक जीवन

भरणी नक्षत्र में जन्मी महिलाओं का विवाह 23-24 वर्ष के बाद हो ही जाता है। विवाह के बाद ये बहुत जल्दी अपने ससुराल में अधिकार जमा लेती है। ससुराल में अपना पूरा वर्चस्व कायम कर लेती है ,बहुत जल्द अपने पति पति से पूर्ण विश्वास प्राप्त कर लेती है। पुरे घर पर अधिकार प्राप्त कर लेने के बाद भी इन्हें अपने सास-ससुर, ननंद-देवर से शिकायत ही रहती है। अपने मायके वालों की सदा तारीफ करती रहती है। उनकी आलोचना इन्हें रत्ती भर भी पसंद नहीं होती।

घर परिवार में ये उन्हीं की बात मानती है जो उनके अनुसार चलता हो। अगर इनका विवाह किसी साधारण दिखने वाले व्यक्ति से हो जाये तो ये जीवनभर उसपर हावी रहती है। अधिकतर भरणी नक्षत्र की महिलाएं उग्र और तेज स्वाभाव की देखी जाती है, अगर कोई इनसे भिड़ने की कोशिश करेगा तो तुरंत लड़ने-भिड़ने को तैयार हो जाती है। इनका पति अपना रौब दिखाकर कभी भी इनसे कोई काम नहीं ले सकता है, उसे इनके साथ केवल अपनी बुद्धिमानी और चतुराई से ही चलना होगा अन्यथा रोज ही विवाद फसाद होता रहेगा।

भरणी महिलाओं का स्वास्थ्य

वैसे तो इनका स्वास्थय ठीक ही रहता है। फिर भी इन्हें अपने नक्षत्र के अनुसार किडनी की परेशानी, रक्तचाप या मूत्राशय की बीमारियों से सावधान रहना चाहिए। कुछ महिलाओं में चर्म रोग, क्षय रोग भी देखने को मिलता है।

भरणी नक्षत्र की महिला

भरणी नक्षत्र की महिलाएं दृढ़ निश्चयी, वचन में दृढ़, अपने कार्य को पूर्ण करने वाली, स्वस्थ, गुणवान और प्रसन्न होती हैं। वे जो कार्य हाथ में लेती हैं, उसे पूरा करके ही दम लेती हैं। कार्य को शीघ्र और समयबद्ध तरीके से पूरा करना इनका गुण होता है।

ये कम खाने वाली होती हैं। इनका शरीर स्वस्थ होता है। साथ ही ये प्रेम में बहुत दृढ़ रहने वाली और आकर्षक व्यक्तित्व की धनी होते हैं।

इनका स्वभाव ऐसा होता है कि ये अपनी आदतों से काफी बदनाम होती हैं और इनका मन मौज-मस्ती के कार्यों में अधिक लगा रहता है। इनकी स्वाभाविक इच्छा शीघ्र सफलता पाने की होती है। भरणी महिलाएं प्रायः पानी से डरती हैं। इसके अलावा, ये शराब के सेवन से भी नहीं हिचकिचाती है।

भरणी नक्षत्र पर यदि अशुभ प्रभाव हो तो ऐसी महिलाएं झूठ बोलने वाली, सत्य पर दृष्टि रखने वाली, पवित्रता पर कम ध्यान देने वाली, अनेक पुत्रों का पिता और दूसरों का धन हड़पने में माहिर होती है। बलवान, शत्रुओं पर अचानक आक्रमण करने वाली, धूर्त, अधर्म कार्यों में रुचि रखने वाली, चित्रकार, धोखेबाज, निम्न स्तर की कर्मचारी, उन्नति की आकांक्षी।

भरणी नक्षत्र के चार चरण होते है।

प्रथम चरण – अगर भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म होगा तो हाथी के समान छोटी और रोयेंदार आंखें, मोटी बड़ी नाक, हाथी के समान दोनों ओर से उभरा हुआ सिर, ऊपरी धड़ में अपेक्षाकृत भारीपन, मोटी और भरी हुई भौहें, पतले बाल, शरीर के बाल घने और सख्त होते हैं। सामान्यतः सिर पर बाल भी कम अर्थात् कम घने होते हैं।

दूसरा चरण – भरणी नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने पर श्याम वर्ण, सुडौल शरीर, हिरण के समान द्रवित आंखें, शरीर में भारीपन, मजबूत छाती और शक्तिशाली पैर, लटका हुआ पेट, झुके हुए कंधे, अधिक बोलने का स्वभाव और भयभीत करने वाला होता है।

तिसरा चरण – भरणी नक्षत्र के तीसरे चरण में फुर्तीला शरीर, श्वेत पुतलियाँ, देखने में निर्दयी और थका देने वाला, लम्बा और विशाल शरीर, बहुत से प्रेम संबंध बनाने वाली, कुछ लोभी, पति से युक्त चंचल स्त्री होती है।

चौथा चरण – चौथे चरण में जन्म लेने वाली भरणी नक्षत्र की महिला का मुख बड़ा, केश और बालों का सफेद होना, हिंसक स्वभाव, झूठ बोलने का स्वभाव, अधिक बोलने वाली, खुशमिजाज, गुप्त रोगी अर्थात जननांगों के किसी रोग से ग्रस्त होता है।

भरणी नक्षत्र की महिलाओं के लिए शुभ रत्न

भरणी नक्षत्र की महिलाओं के लिए हीरा या सफ़ेद जिरकॉन सबसे बेस्ट शुभ और भाग्यशाली रत्न है, इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है, इसलिए इन महिलाओं पर पूर्ण रूप से शुक्र के प्रभाव रहते है। अगर ये महिलाएं इनमें से कोई भी एक रत्न पहनती है तो उनका शुक्र बलवान और शुभ होता है, उसके नकारात्मक प्रभाव खत्म होते है। ऐसा होने से इन महिलाओं के जीवन में उनत्ति तरक्की, आर्थिक उनत्ति, शुभता, सुख शांति और शारीरिक मजबूती आती है।

इसलिए इन महिलाओं को हीरा या सफ़ेद जिरकॉन जरूर धारण करना चाहिए। साथ ही यह रत्न उनके लिए एक सुरक्षा कवच का कार्य भी करेगा। इसके अलावा लाल मूंगा भी भरणी नक्षत्र की महिलाओं के लिए शुभ रत्नों में से एक है,लाल मूंगा धारण करने से इनको शारीरिक और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। साथ ही इन्हें इनके प्रतिद्वंद्वियों और दुश्मनों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *